पुनर्निवास

ganga ghats




दो वर्ष पूर्व मकर संक्रांति के दिन अपनी बात एक कागज़ पर लिखी थी सोचा साझा कर दूँ।
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कहते हैं दुनिया गोल है, आदमी कहीं से भी चले वापस उसी जगह पर पहुंचता है। हमें ज़िन्दगी में कई किताबी बातें अक्सर सच होते दिखलाई पड़ती हैं। कई चीजे ऐसी होती हैं जो कभी नहीं बदलती, उनका स्वरुप चीर काल तक एक सा होता है।

पुनर्निवास

दो वर्ष पूर्व मकर संक्रांति के दिन अपनी बात एक कागज़ पर लिखी थी सोचा साझा कर दूँ। ------------------------------------------------- ...