पुनर्निवास

ganga ghats




दो वर्ष पूर्व मकर संक्रांति के दिन अपनी बात एक कागज़ पर लिखी थी सोचा साझा कर दूँ।
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कहते हैं दुनिया गोल है, आदमी कहीं से भी चले वापस उसी जगह पर पहुंचता है। हमें ज़िन्दगी में कई किताबी बातें अक्सर सच होते दिखलाई पड़ती हैं। कई चीजे ऐसी होती हैं जो कभी नहीं बदलती, उनका स्वरुप चीर काल तक एक सा होता है।

निवेदन

बसंत का मतलब नया समय, नई उम्मीद। प्रस्तुत है मेरी वो कविता जो एक आस जगाती है। इसे लिखे हुए एक साल बीत चुका है फिर भी बिलकुल नई सी लगती है।

भक्ति

एक बात बोलूँ ?? ये जो तुम भक्त-भक्त चिल्लाते रहते हो न....ये कोई नई बात नही है। अरे भक्ति तो हमारी पुरानी परंपरा है। बल्कि हम तो कहेंगे, बिना भक्ति के हम लोग

थोड़ा सा जीवन

सच ही तो है! हर पल हम अपने अंतिम समय के पास जा रहे हैं, पर कुछ को ही इसका आभास है। जीवन वही है जो कारण दे। बिना कारण, जीने का कोई अर्थ नहीं।
मेरा कारण आप सबके समक्ष प्रस्तुत है-

पुआल की गंध

मेरे बचपन का शुरुआती साल मामा गाँव में बीता। मेरा मामा गाँव बिहार के रोहतास जिले में है। बचपन की बहुत सारी यादें हैं जिन्हें मैं कभी भूल नहीं सकता। उस

नाम में क्या रखा है

शेक्सपिअर कहते-कहते मर गए- अजी नाम में क्या रखा है! पर उनकी किसी ने न सुनी। हम किसी और की क्यों सुने ? भई हम तो खुद ही समझदार हैं। किसी मुद्दे पर बहस किये बिना हमारे पेट का खाना पचता कहाँ है!

गालियाँ

क्या आपने शेर को खंबा नोचते देखा है ? या फिर किसी मजबूत इंसान को गुस्से के मारे खुद का बाल नोचते देखा है ? नहीं न ?

पुनर्निवास

दो वर्ष पूर्व मकर संक्रांति के दिन अपनी बात एक कागज़ पर लिखी थी सोचा साझा कर दूँ। ------------------------------------------------- ...