पुआल की गंध

मेरे बचपन का शुरुआती साल मामा गाँव में बीता। मेरा मामा गाँव बिहार के रोहतास जिले में है। बचपन की बहुत सारी यादें हैं जिन्हें मैं कभी भूल नहीं सकता। उस

नाम में क्या रखा है

शेक्सपिअर कहते-कहते मर गए- अजी नाम में क्या रखा है! पर उनकी किसी ने न सुनी। हम किसी और की क्यों सुने ? भई हम तो खुद ही समझदार हैं। किसी मुद्दे पर बहस किये बिना हमारे पेट का खाना पचता कहाँ है!

गालियाँ

क्या आपने शेर को खंबा नोचते देखा है ? या फिर किसी मजबूत इंसान को गुस्से के मारे खुद का बाल नोचते देखा है ? नहीं न ?

भारतीय समाज का मनमौजीपन

सन् 2014 की बात है, एकता कपूर द्वारा निर्देशित एक फ़िल्म आई थी "रागिनी एम.एम.एस-2"। इस फ़िल्म के मुख्य किरदार की भूमिका भूतपूर्व पोर्न स्टार "सनी लियोनी" द्वारा निभाई जा रही थी। रागिनी एम.एम.एस-2 एक "हॉरर एंड इरोटिक" फ़िल्म थी। इन सभी बातों को छोड़ कर इस फ़िल्म की एक अलग विशेषता थी, और वो थी इस फ़िल्म की शुरुआत "हनुमान चालीसा" से होना। तब इस बात पर किसी ने गौर नहीं किया और ऐसी फ़िल्म की शरुआत हनुमान चालीसा से कराने के पीछे क्या लॉजिक था, ये भी अस्पष्ट रहा।

मेरी कल्पना

जब मैं 11 वीं क्लास में था तो मैंने अपने जीवन की पहली रोमैन्टिक कविता लिखी थी। तब लोगो ने उसे पढ़ कर मुझसे यह प्रश्न किया था की कोई इतनी कम उम्र में ऐसी प्रेम कविताएँ कैसे लिख सकता है। पहली दफ़ा तो उन्हें यह लगा की संभवतः यह मेरी अपनी कविता नहीं है, मैं किसी और की कविता को अपनी कह रहा हूँ।
जबकि खुद के अंदर किसी भी तरह की भावनाएं समेटने को कोई तय उम्र नहीं होती। कोई भी आदमी किसी भी उम्र में कुछ भी कर सकता है। कब किसके अंदर किस तरह की जिज्ञासा जाग जाए ये कोई नहीं जानता।
प्रस्तुत है वो कविता जिसे मैंने शीर्षक दिया था "मेरी कल्पना"

प्रेम

कइयों से कहते सुना है, वास्तविक प्रेम जैसी कोई चीज नहीं होती। प्रेम मात्र शरीर के भीतर होने वाली रासायनिक प्रक्रिया है।
जब किसी का सच्चा प्यार टूटता है तो वह रोता है, चीखता है, छटपटाता है फिर समय के साथ धीरे-धीरे स्थिर हो जाता है, सारी भावनाएँ थिथिल हो जाती हैं। तब या तो वह सारी ज़िंदगी बेचैन रहता है या फिर शुन्य हो जाता है। समय उस आघात से लड़ने की शक्ति देता है या कह सकते हैं की हम समय के आगे लाचार हो जाते हैं।
तो क्या समय के साथ प्रेम समाप्त हो जाता है?

पुनर्निवास

दो वर्ष पूर्व मकर संक्रांति के दिन अपनी बात एक कागज़ पर लिखी थी सोचा साझा कर दूँ। ------------------------------------------------- ...