क्या आपने शेर को खंबा नोचते देखा है ? या फिर किसी मजबूत इंसान को गुस्से के मारे खुद का बाल नोचते देखा है ? नहीं न ?
बुजुर्ग कहा करते हैं की बात-बात पे चिढ़ना कमजोरी की निशानी होती है। एक मजबूत इंसान कभी भी अपने विरोध का तुरंत पलट कर जवाब नहीं देता, वो हमेशा सही समय का इंतजार करता है। एक कमजोर आदमी जब चिढ़ता है तो वह कई तरह की हरकतें करता है, कभी चिल्लाता है, कभी ईंट और पथर मारता है और कभी गालियां देता है।
गाली एक कमजोर आदमी द्वारा दी जाने वाली सामान्य प्रतिक्रिया है। बात बात पर गाली देना मानसिक कमजोरी की निशानी है। मुझे ये कहने में तनिक भी संकोच नहीं की इस समय हमारे समाज के अस्सी प्रतिशत लोग इस मानसिक कमजोरी से जूझ रहे हैं।
आपसी लड़ाइयों में लोग अक्सर बड़े शान से एक दूसरे की माँ-बहनो को घसीटते हैं। औरते घर का मान सम्मान होती हैं, और लड़ाइयों में सामने वाले की प्रतिष्ठा को ठेस पहुचना ही असली मकसद होता है।
बदलते परिवेश में गालियाँ देना सभ्य होने की निशानी माने जाने लगी है। you tube पर AIB (ऑल इण्डिया बकचोद) जैसे कार्यक्रम प्रस्तूत हो रहे हैं और इनका विरोध करने वालों को पिछड़ी मानसिकता का माना जा रहा है। संगीत का क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं है। हनी सिंह और बादशाह जैसे गायकों ने संगीत जैसे पवित्र चीज का बेंडा गरक कर रखा है। आज कल बात बात पर बैंचों बोलने वाले लड़के अपने झुण्ड में cool dude के रूप में पहचाने जाते है, और तो और लड़कियाँ भी इस बेहूदा फैशन से अछूती नहीं हैं। मेरे मन में बार-बार एक ही सवाल आता है, क्या अपनी नीचता पर आना ही सभ्य होना है ? क्या अपनी माँ-बहनो को ज़लील करवाना ही आधुनिकता है ?
(पुष्कर)
बुजुर्ग कहा करते हैं की बात-बात पे चिढ़ना कमजोरी की निशानी होती है। एक मजबूत इंसान कभी भी अपने विरोध का तुरंत पलट कर जवाब नहीं देता, वो हमेशा सही समय का इंतजार करता है। एक कमजोर आदमी जब चिढ़ता है तो वह कई तरह की हरकतें करता है, कभी चिल्लाता है, कभी ईंट और पथर मारता है और कभी गालियां देता है।
गाली एक कमजोर आदमी द्वारा दी जाने वाली सामान्य प्रतिक्रिया है। बात बात पर गाली देना मानसिक कमजोरी की निशानी है। मुझे ये कहने में तनिक भी संकोच नहीं की इस समय हमारे समाज के अस्सी प्रतिशत लोग इस मानसिक कमजोरी से जूझ रहे हैं।
आपसी लड़ाइयों में लोग अक्सर बड़े शान से एक दूसरे की माँ-बहनो को घसीटते हैं। औरते घर का मान सम्मान होती हैं, और लड़ाइयों में सामने वाले की प्रतिष्ठा को ठेस पहुचना ही असली मकसद होता है।
बदलते परिवेश में गालियाँ देना सभ्य होने की निशानी माने जाने लगी है। you tube पर AIB (ऑल इण्डिया बकचोद) जैसे कार्यक्रम प्रस्तूत हो रहे हैं और इनका विरोध करने वालों को पिछड़ी मानसिकता का माना जा रहा है। संगीत का क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं है। हनी सिंह और बादशाह जैसे गायकों ने संगीत जैसे पवित्र चीज का बेंडा गरक कर रखा है। आज कल बात बात पर बैंचों बोलने वाले लड़के अपने झुण्ड में cool dude के रूप में पहचाने जाते है, और तो और लड़कियाँ भी इस बेहूदा फैशन से अछूती नहीं हैं। मेरे मन में बार-बार एक ही सवाल आता है, क्या अपनी नीचता पर आना ही सभ्य होना है ? क्या अपनी माँ-बहनो को ज़लील करवाना ही आधुनिकता है ?
(पुष्कर)
सत्य है।
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