बसंत का मतलब नया समय, नई उम्मीद। प्रस्तुत है मेरी वो कविता जो एक आस जगाती है। इसे लिखे हुए एक साल बीत चुका है फिर भी बिलकुल नई सी लगती है।
उम्मीद है पढ़ कर अच्छा लगेगा। अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें।
नव बसंत की कलियों से है
मुझे नई उम्मीद लगी
एक सपनों की फुलवारी है
जो पलकों में है आन सजी
उस कल्पबाग का माली बन कर
मुझ पर एहसान करोगे तुम
बोलो उपकार करोगे तुम ?
है प्रेम रहित मेरा जीवन
जैसे बंजर कोई उपवन
मेरी सूनी सी दुनिया में
थोडा सा प्यार भरोगे तुम
बोलो उपकार करोगे तुम ?
हो वैरागी सा घूम रहा हूँ
जाने मैं किसको ढूंढ रहा हूँ
मेरे जीवन में आकर के
मेरा उद्धार करोगे तुम
बोलो उपकार करोगे तुम ?
(पुष्कर रवि)
उम्मीद है पढ़ कर अच्छा लगेगा। अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें।
नव बसंत की कलियों से है
मुझे नई उम्मीद लगी
एक सपनों की फुलवारी है
जो पलकों में है आन सजी
उस कल्पबाग का माली बन कर
मुझ पर एहसान करोगे तुम
बोलो उपकार करोगे तुम ?
है प्रेम रहित मेरा जीवन
जैसे बंजर कोई उपवन
मेरी सूनी सी दुनिया में
थोडा सा प्यार भरोगे तुम
बोलो उपकार करोगे तुम ?
हो वैरागी सा घूम रहा हूँ
जाने मैं किसको ढूंढ रहा हूँ
मेरे जीवन में आकर के
मेरा उद्धार करोगे तुम
बोलो उपकार करोगे तुम ?
(पुष्कर रवि)

मेरे जीवन में आ कर तुम,
ReplyDeleteबोलो उपकार करोगे तुम?.....
शानदार अभिव्यक्ति!!!
मात्राओं में त्रुटियाँ थीं... अब ठीक है
Deleteबहुत सुन्दर । बहुत ही सुन्दर।
ReplyDeleteआभार...
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