निवेदन

बसंत का मतलब नया समय, नई उम्मीद। प्रस्तुत है मेरी वो कविता जो एक आस जगाती है। इसे लिखे हुए एक साल बीत चुका है फिर भी बिलकुल नई सी लगती है।
उम्मीद है पढ़ कर अच्छा लगेगा। अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें।
yellow flowers
















नव बसंत की कलियों से है
मुझे नई उम्मीद लगी
एक सपनों की फुलवारी है
जो पलकों में है आन सजी
उस कल्पबाग का माली बन कर
मुझ पर एहसान करोगे तुम
बोलो उपकार करोगे तुम ?

है प्रेम रहित मेरा जीवन
जैसे बंजर कोई उपवन
मेरी सूनी सी दुनिया में
थोडा सा प्यार भरोगे तुम
बोलो उपकार करोगे तुम ?

हो वैरागी सा घूम रहा हूँ
जाने मैं किसको ढूंढ रहा हूँ
मेरे जीवन में आकर के
मेरा उद्धार करोगे तुम
बोलो उपकार करोगे तुम ?
(पुष्कर रवि)

4 comments:

  1. मेरे जीवन में आ कर तुम,
    बोलो उपकार करोगे तुम?.....
    शानदार अभिव्यक्ति!!!

    ReplyDelete
    Replies
    1. मात्राओं में त्रुटियाँ थीं... अब ठीक है

      Delete
  2. बहुत सुन्दर । बहुत ही सुन्दर।

    ReplyDelete

पुनर्निवास

दो वर्ष पूर्व मकर संक्रांति के दिन अपनी बात एक कागज़ पर लिखी थी सोचा साझा कर दूँ। ------------------------------------------------- ...